ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

श्री परशुराम गायत्री मंत्र (द्वितीय पाठ)

ॐ जामदग्नाय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुरामः प्रचोदयात्

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारगायत्री मंत्र
स्वरूपजमदग्निनंदन महावीर परशुराम
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हम महर्षि जमदग्नि के पुत्र को जानते हैं, उन महावीर का हम ध्यान करते हैं। वे भगवान परशुराम हमारी चेतना को आलोकित करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

ज्ञात-अज्ञात भय से मुक्ति, ऋण-मुक्ति, और आत्म-विश्वास एवं संकल्प-शक्ति का सुदृढ़ीकरण

विस्तृत लाभ

ज्ञात-अज्ञात भय से मुक्ति, ऋण-मुक्ति, और आत्म-विश्वास एवं संकल्प-शक्ति का सुदृढ़ीकरण।

जप काल

परशुराम जयंती (वैशाख शुक्ल तृतीया) अथवा नित्य प्रातःकाल एकाग्रचित्त होकर।

इसे भी पढ़ें

अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र