श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ कलहंसगतये नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
राजहंस पक्षी के समान सुचारु और लयबद्ध गति (चाल) वाली।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन में राजहंस जैसी 'नीर-क्षीर विवेक' (बुद्धिमत्ता) की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
जीवन में राजहंस जैसी 'नीर-क्षीर विवेक' (बुद्धिमत्ता) की प्राप्ति।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मायायै नमः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौ: जगत्प्रसूत्यै नमः।
ॐ सर्वसिद्धाय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ सानन्दविभवायै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं सर्व विघ्न निवारणाय महा क्रोध भैरवाय नमः।