श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ करामर्षायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
अपने हाथों में क्रोध रूपी प्रलय-अग्नि को धारण करने वाली।
इस मंत्र से क्या होगा?
(शत्रु नाश हेतु)
विस्तृत लाभ
(शत्रु नाश हेतु)
जप काल
देवी की मूर्ति, यंत्र या चित्र के सम्मुख 'ककारादि सहस्रार्चन' विधि द्वारा।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे। मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम्॥
ॐ यं रः अनादिशक्तिधाम्ने सर्वात्मने करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः
ॐ आह्लादजनन्यै नमः
ॐ बाहू द्वौ चन्द्रवदना पातु।
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः । स्कन्दः कुमारः सेनानीः स्वामी शङ्करसम्भवः ॥