शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ क्रौञ्चदारणाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपर्वत-भेदक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
क्रौंच पर्वत को भेदने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों में सफलता
विस्तृत लाभ
असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों में सफलता।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ॐ दित्ये नमः
क्षरं प्रधानममृताक्षरं हरः क्षरात्मानावीशते देव एकः। तस्याभिध्यानाद्योजनात्तत्त्वभावाद् भूयश्चान्ते विश्वमायानिवृत्तिः॥
ॐ मोहनाय नमः।
ॐ कंजलोचनाय नमः
बालग्रहाभिभूतानां बालानां शान्तिकारकम्। सङ्घातभेदे च नृणां मैत्रीकरणमुत्तमम्॥ 17