शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ कुञ्जविहारिण्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो वृंदावन के कुंजों में विहार करती हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
तीर्थ-यात्रा और वृंदावन वास का लाभ
विस्तृत लाभ
तीर्थ-यात्रा और वृंदावन वास का लाभ।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
बिभ्राणः शुक बीजपूर कमलं माणिक्यकुम्भं अङ्कुशं पाशं कल्पलतां च खड्ग विलसत् ज्योतिः सुधानिर्झरः । श्यामेनात्त सरोरुहेण सहितो देवीद्वयेनान्तिके गौराङ्गो वरदान हस्त कमलो लक्ष्मीगणेशोऽवतात् ॥
ॐ वेणुनादविशारदाय नमः
ॐ दुर्गदारिण्यै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये सर्वभूतान्तरात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
जो अत्यंत तेजस्वी और महाप्रतापी हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: व्यक्तित्व में तेज और ओज की वृद्धि) 19।
ॐ अञ्जनागर्भसम्भूताय नमः