श्रीकृष्ण मंत्र
मखेश्वरि क्रियेश्वरि स्वधेश्वरि सुरेश्वरि त्रिवेदभारतीश्वरि प्रमाणशासनेश्वरि। रमेश्वरि क्षमेश्वरि प्रमोदकाननेश्वरि व्रजेश्वरि व्रजाधिपे श्रीराधिके नमोऽस्तु ते॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे यज्ञों, क्रियाओं, देवताओं, वेदों, प्रमाणों, क्षमा, और प्रमोद-वन की ईश्वरी! हे व्रज की अधिष्ठात्री श्री राधिके! आपको नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: सभी कार्यों और अनुष्ठानों में सफलता
विस्तृत लाभ
लाभ: सभी कार्यों और अनुष्ठानों में सफलता।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कामपालाय नमः
बालार्कारुणकान्तिर्वामे बालां वहन् अङ्के । लसदिन्दीवर हस्तं गौराङ्गीं रत्नशोभाढ्याम् ॥ दक्षे अङ्कुश वरदानं वामे पाशं च पायसं पात्रम् । नीलांशुक समान पीठपद्मारुणे तिष्ठन् संकटहरणः पायात् ॥
ॐ कामरूपिण्यै नमः
ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥
ॐ मोहनाय नमः।
ॐ सदाहनुमदाश्रिताय नमः