शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं। गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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टिप्पणी
ओंकार शिव - तुरीय अवस्था
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सभासु वदतां श्रेष्ठो राज्ञां भवति च प्रियः। वैदिकं तान्त्रिकं चैव मान्त्रिकं ज्ञानमुत्तमम्॥
नीलाब्ज दाडिमी वीणा शालि गुञ्जाक्ष सूत्रकम् । दधदुच्छिष्ट नामायं गणेशः पातु मोक्षदः ॥
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
श्री राम जय राम जय जय राम (Sri Ram Jaya Ram Jaya Jaya Ram)
ॐ जाड्यविध्वंसनकर्त्र्यै नमः