शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ प्रतापवते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपप्रतापी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका प्रताप तीनों लोकों में सूर्य के समान व्याप्त है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
तेजस्विता
विस्तृत लाभ
तेजस्विता
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नमो रुद्रायातताविने क्षेत्राणां पतये नमः।
कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम। श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥
ॐ करमालानन्दकर्त्र्यै नमः
अशेषहावभावधीरहीरहारभूषिते प्रभूतशातकुम्भकुम्भकुम्भकुम्भसुस्तनि। प्रशस्तमन्दहास्यचूर्णपूर्णसौख्यसागरे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ शृङ्गारिणे नमः
वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नमः। उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम्॥