शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ पुलिन्दकन्याभर्त्रे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवल्ली-नाथ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पुलिंद कन्या (वन-पुत्री वल्ली) के स्वामी को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सहज प्रेम और प्रकृति से जुड़ाव
विस्तृत लाभ
सहज प्रेम और प्रकृति से जुड़ाव।
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ॐ दशग्रीवकुलान्तकाय नमः
कृषिश्च मे वृष्टिश्च मे जैत्रं च मे औद्भिदं च मे...
ॐ अनेकसोमसूर्याग्निगणाकाराय नमः।
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ महेश्वरप्रियङ्कर्यै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये परमानन्दाद्वैतात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः