शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ शरच्चन्द्रायुतप्रभाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशरद-चंद्र स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शरद पूर्णिमा के हजारों चंद्रमाओं के समान प्रभा वाले देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
उग्रता और क्रोध की समाप्ति
02
शीतलता की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
उग्रता और क्रोध की समाप्ति; शीतलता की प्राप्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं नमः।
अक्षमालां कुठारं च रत्नपात्रं स्वदन्तकम् । धत्ते करैर्विघ्नराजो ढुण्ढिनाम मुदेऽस्तु नः ॥
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
ॐ पुण्यचारित्रकीर्तनाय नमः
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥
ॐ द्विरूपभृते नमः