त्रिभुवन महालक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे तीनों लोकों की स्वामिनी! हमारे दारिद्र्य का नाश करें और प्रचुर धन प्रदान करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर दरिद्रता का नाश, अचानक धन (Abundance)
विस्तृत लाभ
घोर दरिद्रता का नाश, अचानक धन (Abundance)।
जप काल
72 दिन में 1.25 लाख जप, फिर दशांश हवन 25।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥ 17
ॐ श्री राधायै स्वाहा
ॐ वेणुनादविशारदाय नमः
ॐ नं रीं नित्यतृप्तधाम्ने तत्पुरुषात्मने तर्जनीभ्यां नमः
ॐ सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्रं पातु निरन्तरम्। (स्वरूप: सरस्वती | लाभ: कानों, श्रवण-शक्ति व नाद-ग्रहण की रक्षा | अर्थ: सरस्वती मेरे कानों की निरंतर रक्षा करें) 8
ॐ चक्रधराय नमः