शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ सिंहिकाप्राणभञ्जनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसिंहिका-नाशक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
आकाश में उड़ते हुए छाया पकड़ने वाली राक्षसी सिंहिका का वध करने वाले।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आ नो दिवो बृहतः पर्वतादा सरस्वती यजता गन्तु यज्ञम्। हवं देवी जुजुषाणा घृताची शग्मां नो वाचमुशती शृणोतु॥
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥
ॐ निर्गुणाय नमः
दिव्याद्वृन्दारण्यकल्पद्रुमाधः श्रीमद्रत्नागारसिंहासनस्थौ। श्रीश्रीराधाश्रीलगोविन्ददेवौ प्रेष्ठालीभिः सेव्यमानौ स्मरामि॥
ॐ कुलीनार्तिनाशिन्यै नमः
ॐ वामनप्रियाय नमः