एकादशमुखी (11-मुख) हनुमान महा-अस्त्र मंत्र
ॐ स्फेम् क्रौम् क्षौम् ग्लौम् वम् राम् वा ह्रौम् ह्रीम् राम् स्फेम् क्रौम् क्षौम् ग्लौम् क्षीम् क्षौम् धुम् हम् ह्लौम् ह्रीम् राम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
(यह तांत्रिक बीजों का एक जटिल समूह है जो 11 मुखों - वानर, भैरव, अग्नि, हयग्रीव, वराह, नाग, रुद्र, नरसिंह, गज, सौम्य आदि की शक्तियों को एक साथ जागृत करता है।)
इस मंत्र से क्या होगा?
मारण, सम्मोहन, उच्चाटन जैसे घोर तांत्रिक प्रयोगों से पूर्ण रक्षा एवं 11 दिशाओं (दसों दिशाएं + पाताल) में अभेद्य सुरक्षा तंत्र का निर्माण
विस्तृत लाभ
मारण, सम्मोहन, उच्चाटन जैसे घोर तांत्रिक प्रयोगों से पूर्ण रक्षा एवं 11 दिशाओं (दसों दिशाएं + पाताल) में अभेद्य सुरक्षा तंत्र का निर्माण 12।
जप काल
यह विद्या ऋषि अगस्त्य द्वारा लोपामुद्रा को उपदिष्ट है। इसे विशेष तंत्र-अनुष्ठान के समय जपा जाता है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवीलक्ष्मीः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ महोरस्काय नमः
वेदस्य म आणीस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीरनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधाम्यृतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि॥
ॐ केशवाय नमः
ॐ कलावत्यै नमः
यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवैः वेदैः साङ्गपदक्रमोपनिषदैः गायन्ति यं सामगाः । ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो यस्यान्तं न विदुः सुरासुरगणा देवाय तस्मै नमः ॥