शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ स्तम्भजाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपस्तम्भ-नरसिंह
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो जड़ खंभे को चीरकर प्रकट हुए, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों का सिद्ध होना
02
भौतिक नियमों से परे ईश्वरीय सहायता
विस्तृत लाभ
असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों का सिद्ध होना; भौतिक नियमों से परे ईश्वरीय सहायता।
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ॐ प्रभवाय नमः
यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च। सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु॥ 18
ॐ दक्षाध्वरहराय नमः
ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥