शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ सुप्रसन्नायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सदैव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में रहती हैं, उन्हें नमन 16।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबलः। राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालितः॥ दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः। हनुमान् शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः॥
जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी॥
ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदाशङ्खाद्यायुधाय नमः
ॐ अनेककण्ठाय नमः।
गाङ्गेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रौञ्चारिश्च षडाननः ॥
ॐ सर्ववासाय नमः