ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

श्रीकृष्ण मंत्र

ॐ तृणीकृततृणावर्ताय नमः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपतृणावर्त-संहारक
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

तृणावर्त दैत्य को तिनके के समान नष्ट करने वाले को नमस्कार।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

वात-रोग एवं अंधड़ से रक्षा

विस्तृत लाभ

वात-रोग एवं अंधड़ से रक्षा

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

यं यं कामयते कामं तं तं प्राप्नोति साधकः। राधाकृपाकटाक्षेण भक्तिः स्यात् प्रेमलक्षणा॥

ॐ वरेण्यायै नमः

ॐ परब्रह्मणे नमः

ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्‍डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी‍ का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भू‍त, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।

ॐ भूपतये नमः।

जो अत्यंत तेजस्वी और महाप्रतापी हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: व्यक्तित्व में तेज और ओज की वृद्धि) 19।