शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
वक्रतुण्ड मंत्र
ॐ वक्रतुण्डाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअवतार मंत्र
स्वरूपवक्रतुण्ड (वाहन: सिंह)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वक्रतुण्ड को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ईर्ष्या, स्वार्थ और मत्सरासुर (Jealousy) से पूर्ण मुक्ति
विस्तृत लाभ
ईर्ष्या, स्वार्थ और मत्सरासुर (Jealousy) से पूर्ण मुक्ति।
जप काल
स्वयं के भीतर ईर्ष्या भाव उत्पन्न होने पर आत्म-निरीक्षण के समय।
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ॐ सीतान्वेषणपण्डिताय नमः
आत्मनः शक्तिमुद्वीक्ष्य मानोत्साहौ तु यो व्रजेत्। शत्रूनेकोऽपि हन्याच्च क्षत्रियान् भार्गवो यथा॥
ॐ वर्णाश्रयप्रदाय नमः
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ कथंकारपदार्थभुवे नमः
ॐ कालीयफणिमाणिक्यरञ्जितश्रीपदाम्बुजाय नमः