शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ वार्धौमैनाकपूजिताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमैनाक-पूजित
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
समुद्र पार करते समय मैनाक पर्वत द्वारा पूजे गए भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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ॐ युधिष्ठिरप्रतिष्ठात्रे नमः
ॐ त्रिककुब्धाम्ने नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये भूतभविष्यत् तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ॐ कृष्णमन्त्राधिदेवतायै नमः
ॐ वज्रशक्त्यभयान्विताय नमः