शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
यदा तमस्तन्न दिवा न रात्रिर्न सन्नचासच्छिव एव केवलः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जब कोई अंधकार नहीं था, न दिन था न रात, न सत् था न असत्, तब केवल एक 'शिव' ही थे
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ चञ्चलद्वालसन्नद्धलम्बमानशिखोज्ज्वलाय नमः
ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात्॥
ॐ अनिर्देश्यवपुषे नमः
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
ॐ ईशानाय नमः