शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ आं ह्रीं क्रों सहस्रार हुं फट् स्वाहा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपप्राण-प्रतिष्ठा मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
'आं', 'ह्रीं', 'क्रों' बीजों से युक्त यह सुदर्शन-नरसिंह मंत्र यंत्र साधना में प्राण-प्रतिष्ठा के समय जपा जाता है।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महोदराय विद्महे महाजठराय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
ॐ सर्वार्तिघ्न्यै नमः
ॐ रेणुकातनयाय नमः
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे