अगजानन ध्यान मंत्र
अगजानन पद्मार्कं गजाननमहर्निशम् । अनेकदन्तं भक्तानाम् एकदन्तमुपास्महे ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो पार्वती के मुख रूपी कमल के लिए सूर्य के समान हैं, जो गजानन हैं, और जो भक्तों को अनेक वरदान देने वाले हैं, उन एकदंत की हम दिन-रात उपासना करते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
इष्ट के प्रति अटूट भक्ति में वृद्धि और ईश्वरीय प्रेम की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
इष्ट के प्रति अटूट भक्ति में वृद्धि और ईश्वरीय प्रेम की प्राप्ति।
जप काल
प्रातःकाल या संध्या वंदन के समय श्लोक गान।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
प्रतीच्यां उन्मत्त भैरवाय नमः प्रतीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा॥
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
ॐ सर्वात्मने नमः
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह। प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥
ॐ सुकीर्तये नमः