शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ अग्नाविष्णू सजोषसेमा वर्धन्तु वां गिरः। द्युम्नैर्वाजेभिरागतम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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टिप्पणी
हे अग्नि और विष्णु! आप दोनों प्रसन्न होकर मेरे वचनों को पुष्ट करें
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥
ॐ जानकीवल्लभाय नमः
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
ॐ क्रतवे नमः
ॐ सहस्राक्ष्यै नमः
ॐ दान्ताय नमः