शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ अग्निगर्भाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपतेज स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अग्नि के गर्भ (मूल तेज) को धारण करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंतर्निहित सुप्त शक्तियों का जागरण
विस्तृत लाभ
अंतर्निहित सुप्त शक्तियों का जागरण।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गोवर्धनाचलोद्धर्त्रे नमः
ॐ उपेन्द्राय नमः
जो महान तपस्वी महर्षि जमदग्नि के पुत्र हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: पितृ-दोष शांति) 19।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये सूर्यः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ शर्वाण्यै नमः
कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम्। सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥