परशुराम शक्ति उद्घोष मंत्र
अग्रतश्चतुरो वेदान् पृष्ठतः सशरं धनुः। उभाभ्यां च समर्थोऽहं शापादपि शरादपि॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
मेरे आगे चारों वेद हैं (ब्रह्म-ज्ञान) और पीछे बाणों सहित धनुष है (क्षत्र-तेज)। मैं दोनों में ही पूर्ण समर्थ हूँ—शाप देने में भी और बाण चलाने में भी।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान (शास्त्र) और पराक्रम (शस्त्र) का संतुलित विकास
विपरीत परिस्थितियों में आत्म-बल
विस्तृत लाभ
ज्ञान (शास्त्र) और पराक्रम (शस्त्र) का संतुलित विकास; विपरीत परिस्थितियों में आत्म-बल।
जप काल
शौर्य-साधना, वाद-विवाद या विद्यारंभ के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अधरौष्ठं हृषीकेशो दन्तपंक्तिं गदाग्रजः । रासेश्वरश्च रसनां तालुकं वामनो विभुः ॥
ॐ सत्यनिधये नमः
ॐ उग्र (अहोबिल) नरसिंहाय नमः
ॐ सूक्ष्मायै नमः
वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमः कालाय नमः कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमो बलाय नमो बलप्रमथनाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः॥
ॐ हरिद्वर्णाय नमः