शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारव्यापकता मंत्र
स्वरूपसर्वव्यापी / अंतर्यामी नारायण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
इस ब्रह्मांड में भीतर और बाहर जो कुछ भी है, नारायण उस सबको व्याप्त करके स्थित हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्वत्र ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव और मन की असीम शुद्धि
विस्तृत लाभ
सर्वत्र ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव और मन की असीम शुद्धि 2।
जप काल
नित्य पूजा या संध्यावंदन के दौरान।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विद्युन्मालायै नमः
ॐ पद्महस्तायै नमः
कल्हारांबुज बीजपूरक गदा दन्तेक्षु बाणैः सदा बिभ्राणो मणिकुम्भ शालिकलशौ पाशं च चक्रान्वितम् । गौराङ्ग्या रुचिराविन्दकरया देव्या सदा संयुतः शोणाङ्कुश शुभमातनोतु भजतामुद्दण्डविघ्नेश्वरः ॥
ॐ रामाय हुं फट् स्वाहा
रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र। दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम्॥
ॐ महाद्युतये नमः