नीलग्रीव स्तुति मंत्र
असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः। उतैनं गोपा अदृशन्नदृशन्नुदहार्यः। उतैनं विश्वा भूतानि स दृष्टो मृडयाति नः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो नीले कंठ वाले और लाल वर्ण वाले रुद्र (सूर्य रूप में) उदित हो रहे हैं, उन्हें ग्वाले और पनिहारिनें भी देखती हैं। वे सभी जीवों द्वारा देखे जाते हैं, वे हम पर कृपा करें 41।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञान का अंधकार दूर होना, और भगवान की प्रत्यक्ष कृपा दृष्टि प्राप्त होना
विस्तृत लाभ
अज्ञान का अंधकार दूर होना, और भगवान की प्रत्यक्ष कृपा दृष्टि प्राप्त होना 37।
जप काल
प्रातःकाल सूर्य दर्शन के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दुर्योधनकुलान्तकाय नमः
ॐ प्रद्युम्नाय नमः
अयं यः सृञ्जये पुरो दैववाते समिध्यते । द्युमाँ अमित्रदम्भनः ॥
रामाय धनुष्पाणये स्वाहा
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥ 18
जो अदम्य साहस वाले परम वीर हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: साहस और निर्भयता) 19।