शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
एको रुद्र मंत्र
एको हि रुद्रो न द्वितीयाय तस्थुर् य इमांल्लोकानीशत ईशनीभिः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअद्वैत ज्ञान मंत्र
स्वरूपअद्वितीय रुद्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रुद्र वास्तव में एक ही हैं, कोई दूसरा नहीं है। वे ही अपनी शक्तियों से इन सभी लोकों पर शासन करते हैं 53।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
द्वैत भाव का नाश और अद्वैत शिव-चेतना की जागृति
विस्तृत लाभ
द्वैत भाव का नाश और अद्वैत शिव-चेतना की जागृति 53।
जप काल
ज्ञान-साधना के समय।
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