शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
घ्राणं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं पातु सरस्वती। भुजौ तु पातु वरदा हृदय पातु सुन्दरी॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारलक्ष्मी कवच (हृदय-रक्षा मंत्र)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
नासिका की महालक्ष्मी, कंठ की सरस्वती, भुजाओं की वरदा और हृदय की रक्षा सुंदरी देवी करें 45।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाणी, श्वसन और हृदय की आध्यात्मिक व भौतिक रक्षा
विस्तृत लाभ
वाणी, श्वसन और हृदय की आध्यात्मिक व भौतिक रक्षा।
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रहस्यमपि हि ब्रूयुर्लोकैकहितदृष्टयः। शिव उवाच- धर्मार्थकाममोक्षाणामनायासं सुसिद्धिदम्॥
स्वदन्त पाशाङ्कुश रत्नपात्रं करैर्दधानो हरिनीलगात्रः । रक्तांशुको रत्नकिरीटमाली भूत्यै सदा मे द्विमुखो गणेशः ॥
ॐ वकारसुखकलासंस्थाय नमः
ॐ कबन्धारूढसंस्थानायै नमः
ॐ श्री राधायै स्वाहा