श्रीराम मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं मनसा देव्यै स्वाहा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिस प्रकार भ्रमरी तमाल वृक्ष का आश्रय लेती है, उसी प्रकार श्री हरि के शरीर का आश्रय लेने वाली मंगल-देवता लक्ष्मी की कृपा-दृष्टि मेरे लिए मंगलदायिनी हो। *
इस मंत्र से क्या होगा?
विष-भय निवारण, धन-संरक्षण और नाग-दोष शांति
देवी भागवत पुराण में मनसा देवी को लक्ष्मी का ही अंश माना गया है
विस्तृत लाभ
विष-भय निवारण, धन-संरक्षण और नाग-दोष शांति। देवी भागवत पुराण में मनसा देवी को लक्ष्मी का ही अंश माना गया है 54।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ परशुहस्ताय नमः
ॐ अनन्तदृष्टये नमः
ॐ कारणार्चनहर्षितायै नमः
ॐ नगभेदिनें नमः
ॐ एकदन्ताय नमः
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।