शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम अष्टकम् (समापन श्लोक)
इति श्रीप. प. श्रीवासुदेवानन्दसरस्वतीविरचितं श्रीपरशुरामस्तोत्रं संपूर्णम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र समापन
स्वरूपपरमहंस रचित
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
इस प्रकार परमहंस परिव्राजकाचार्य श्री वासुदेवानंद सरस्वती द्वारा रचित श्री परशुराम स्तोत्र संपूर्ण हुआ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्तोत्र की पूर्णता का फल
विस्तृत लाभ
स्तोत्र की पूर्णता का फल।
जप काल
पाठ के अंत में।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये पञ्चमहाभूतानि तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ अनन्ताय नमः
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
ॐ ऐं ऐं मनो वाञ्छित सिद्धये ऐं ऐं ॐ
ॐ सुरार्चिताय नमः