श्रीराम मंत्र
ॐ जृम्भाय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
विस्तार लेने वाले (विराट) देव को नमस्कार।
इस मंत्र से क्या होगा?
कार्यक्षेत्र और व्यापार में विस्तार
विस्तृत लाभ
कार्यक्षेत्र और व्यापार में विस्तार।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ राधाकृष्णभ्यां नमः
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः
ॐ नृसिंहः पातु वायव्यां सौम्यं भूषणविग्रहः
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
ऐं ह्रीं श्रीं क्रौं हौं ह्रूं क्षूं लाट भैरवाय क्षूं ह्रूं हौं क्रौं श्रीं ह्रीं ऐं नमः।