श्रीराम मंत्र
ॐ कमनीयविभूषणायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिनका नैसर्गिक सौन्दर्य ही उनका सबसे बड़ा आभूषण है।
इस मंत्र से क्या होगा?
बाह्य आभूषणों की आवश्यकता से परे आत्म-सौन्दर्य का बोध
विस्तृत लाभ
बाह्य आभूषणों की आवश्यकता से परे आत्म-सौन्दर्य का बोध।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अहं रुद्राय धनुरातनोमि ब्रह्मद्विषे शरवे हन्तवा उ। अहं जनाय समदं कृणोम्यहं द्यावापृथिवी आ विवेश॥
ॐ अकिञ्चनवरप्रदायै नमः
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्॥
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥
ॐ श्रीमते नमः
ॐ कालीयफणिमाणिक्यरञ्जितश्रीपदाम्बुजाय नमः