श्रीराम मंत्र
ॐ कौलिकप्रियकारिण्यै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
कौल साधकों का नित्य हित और कल्याण करने वाली माता।
इस मंत्र से क्या होगा?
साधकों का भौतिक कल्याण और आध्यात्मिक रक्षा
विस्तृत लाभ
साधकों का भौतिक कल्याण और आध्यात्मिक रक्षा।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8
दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम्। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥
ॐ सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः कासि त्वं महादेवीति। साब्रवीत्- अहं ब्रह्मस्वरूपिणी। मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत्। शून्यं चाशून्यं च॥
ॐ जनार्दनाय नमः
ॐ नमो भगवते रामचन्द्राय
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः