शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भविष्य पुराण आधारित गायत्री - 2
ॐ महागणेशाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारगायत्री मंत्र
स्वरूपमहागणेश
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम महागणेश को जानते हैं, वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं। वे दन्ती हमें प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
उच्च पद, सत्ता और विशाल आध्यात्मिक बल की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
उच्च पद, सत्ता और विशाल आध्यात्मिक बल की प्राप्ति।
जप काल
नेतृत्व क्षमता की वृद्धि हेतु।
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ॐ श्रद्धायै नमः
अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं सर्व विघ्न निवारणाय महा क्रोध भैरवाय नमः।
ॐ रामचूडामणिप्रदायकाय नमः
ॐ जगद्व्यापिने नमः
कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम्। सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥