शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ मङ्गलाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपपरम मंगल
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो साक्षात् मंगल रूप हैं और अमंगलों का नाश करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्व-कल्याण
विस्तृत लाभ
सर्व-कल्याण
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पादौ सौभद्रिका पातु।
व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥
ॐ रुद्रावीर्यसमुद्भवाय नमः
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥
ॐ कदलीदर्शनोद्यतायै नमः
ॐ मुमुक्षवे नमः