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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

देवी सूक्त मंत्र - 4

मया सो अन्नमत्ति यो विपश्यति यः प्राणिति य ईं शृणोत्युक्तम्। अमन्तवो मां त उप क्षियन्ति श्रुधि श्रुत श्रद्धिवं ते वदामि॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र |
स्वरूपप्राणाधार शक्ति
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो भी अन्न खाता है, देखता है, श्वास लेता है या सुनता है, वह मेरी ही शक्ति से ऐसा करता है। जो मुझे नहीं मानते वे नष्ट हो जाते हैं। हे श्रवण करने वाले! श्रद्धापूर्वक सुनो, मैं तुम्हें परम सत्य बता रही हूँ 1।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

प्राण शक्ति (Vital energy) में वृद्धि और भौतिक सुख-सुविधा

विस्तृत लाभ

प्राण शक्ति (Vital energy) में वृद्धि और भौतिक सुख-सुविधा।

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