नारद पुराणोक्त अष्टादशाक्षर (18-अक्षरी) महामंत्र
ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
महाबलशाली भगवान आंजनेय को मेरा नमस्कार है, मैं स्वयं को उनकी दिव्य ऊर्जा के प्रति समर्पित (स्वाहा) करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
ऊपरी बाधाओं, भूत-प्रेत (Evil spirits), काले जादू और भयंकर रोगों (जैसे प्लीहा वृद्धि/Spleen enlargement) से त्वरित रक्षा तथा अस्त्र-शस्त्र से बचाव
विस्तृत लाभ
ऊपरी बाधाओं, भूत-प्रेत (Evil spirits), काले जादू और भयंकर रोगों (जैसे प्लीहा वृद्धि/Spleen enlargement) से त्वरित रक्षा तथा अस्त्र-शस्त्र से बचाव 7।
जप काल
21,000 बार पुरश्चरण। रोग निवारण हेतु रोगी के उदर पर पान का पत्ता रखकर बदरी (बेर) की लकड़ी से अभिमंत्रित करने का तांत्रिक विधान 7।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ज्ञानशक्तिधरः स्कन्दः वल्लीकल्याणसुन्दरः । देवसेनामनःकान्तः कार्तिकेयो नमोऽस्तु ते ॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विज्ञानात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कृष्णानन्दविवर्धिन्यै नमः
ॐ वृषभारूढाय नमः
ॐ दुर्गमतायै नमः
पाशाङ्कुशापूप कुठारदन्तं चञ्चत्करकॢप्त वराङ्गुलीयकम् । पीतप्रभं कल्पतरोरधस्थं भजामि नृत्तोपपदं गणेशम् ॥