ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

स्कंद स्तुति

नमो गुहाय भूतानां गुहासु निहिताय च । अणोरणीयसे तुभ्यं महतोऽपि महीयसे ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारश्लोक 3
स्वरूपगुह (हृदयवासी)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

प्राणियों के हृदय रूपी गुफा में छिपे हुए, अणु से भी सूक्ष्म और महान से महान 'गुह' को नमस्कार है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अंतर्मन की शुद्धि और परमात्मा की अनुभूति

विस्तृत लाभ

अंतर्मन की शुद्धि और परमात्मा की अनुभूति।

जप काल

गहन ध्यान अवस्था में।

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