पावका नः सरस्वती (सरस्वती सूक्त)
पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। यज्ञं वष्टु धियावसुः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
पवित्र करने वाली, अन्न तथा बल से युक्त और बुद्धि रूपी धन वाली माँ सरस्वती हमारे इस यज्ञ (ज्ञान-साधना) को स्वीकार करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन और विचारों की शुद्धि, लौकिक शिक्षा के साथ पारलौकिक ज्ञान की प्राप्ति और ब्रह्मांडीय व्यवस्था (ऋत) से जुड़ाव
विस्तृत लाभ
मन और विचारों की शुद्धि, लौकिक शिक्षा के साथ पारलौकिक ज्ञान की प्राप्ति और ब्रह्मांडीय व्यवस्था (ऋत) से जुड़ाव।
जप काल
प्रातःकाल, यज्ञ या विद्यारंभ संस्कार के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ महास्वनाय नमः
ॐ पुण्याय नमः
ॐ कामिने नमः
ॐ शतायुष्यप्रदात्रे नमः
ॐ दक्षिणां वृषभानुजा पातु।