सद्योजात मंत्र (पश्चिम मुख)
सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः। भवे भवे नातिभवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैं सद्योजात (नवोत्पन्न) की शरण में हूँ। सद्योजात को मेरा बारंबार नमन। हे भगवान! मुझे जन्म-जन्मांतर के संसार-चक्र से मुक्त करें और मोक्ष प्रदान करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
नवजीवन, नवीन कार्यों में सफलता, और जन्म-मरण के चक्र (संसार) से मोक्ष की लालसा की जागृति
विस्तृत लाभ
नवजीवन, नवीन कार्यों में सफलता, और जन्म-मरण के चक्र (संसार) से मोक्ष की लालसा की जागृति 21।
जप काल
पश्चिम दिशा की ओर मुख करके।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ काशीश्वरमनोरमायै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये भगवान्विष्णुः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
वासुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ रक्षोबलविमर्दनाय नमः
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः