शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
द्व्यक्षर साम्राज्य लक्ष्मी
ॐ स्ह्क्ल्रीं हं नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
यह एक कूट-बीज है जो साम्राज्य और शक्ति का ध्वनि-प्रतीक है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
राजसत्ता, उच्च प्रशासनिक सफलता
विस्तृत लाभ
राजसत्ता, उच्च प्रशासनिक सफलता।
जप काल
ग्रहण या अमावस्या की रात्रि में।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अग्निजन्मने नमः
ॐ विभवे नमः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं रां रामाय रघुनन्दनाय जानकीवल्लभाय स्वाहा
पूर्वे असितांग भैरवाय नमः पूर्वे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ महातेजसे नमः
ॐ नमो भगवति सरस्वति परमेश्वरि। वाग्वादिनि मम विद्यां देहि भगवति। भंसवाहिनि हंससमारूढे बुद्धिं देहि देहि। प्रज्ञां देहि देहि विद्यां परमेश्वरि सरस्वति स्वाहा॥