शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
लक्ष्मी विनायक मंत्र
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक धन-प्राप्ति मंत्र
स्वरूपलक्ष्मी विनायक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे सौम्य गणपति, सभी जनों को मेरे अनुकूल कर ऐश्वर्य दें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
लक्ष्मी (धन) की स्थिरता और अगाध सौभाग्य
विस्तृत लाभ
लक्ष्मी (धन) की स्थिरता और अगाध सौभाग्य।
जप काल
कमल गट्टे की माला से अनुष्ठान।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शरवणभवाय नमः
ॐ प्रसन्नपद्मवदनायै नमः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामिलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षणभैरवाय मम दारिद्र्य विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं।
ॐ जनार्दनाय नमः
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः। बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये॥
ॐ परमात्मिकायै नमः