शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ स्थविरो-ध्रुवाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अत्यंत प्राचीन और ध्रुव (स्थिर)
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अचल संपत्ति और स्थिर बुद्धि
विस्तृत लाभ
अचल संपत्ति और स्थिर बुद्धि 81
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥
असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः। उतैनं गोपा अदृशन्नदृशन्नुदहार्यः। उतैनं विश्वा भूतानि स दृष्टो मृडयाति नः॥
ॐ कालशमनाय नमः।
ॐ जितामित्राय नमः
अग्रतश्चतुरो वेदान् पृष्ठतः सशरं धनुः। उभाभ्यां च समर्थोऽहं शापादपि शरादपि॥
ॐ सर्वतीर्थात्मकाय नमः