श्रीराम मंत्र
उरुदघ्ने नाभिदघ्ने हृद्दघ्ने कण्ठदघ्नके। राधाकुण्डजले स्थिता यः पठेत्साधकः शतम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो साधक राधाकुण्ड के जल में जांघ, नाभि, हृदय या कंठ तक खड़े होकर इसका सौ बार पाठ करता है...
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: राधाकुण्ड के जल में ध्यान की सिद्धि
विस्तृत लाभ
लाभ: राधाकुण्ड के जल में ध्यान की सिद्धि।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अधरौष्ठं हृषीकेशो दन्तपंक्तिं गदाग्रजः । रासेश्वरश्च रसनां तालुकं वामनो विभुः ॥
ॐ शुचये नमः
ॐ ग्रन्थबीजरूपायै स्वाहा मां सर्वतोऽवतु। (अर्थ: ग्रंथों का बीज रूप देवी मेरी सभी दिशाओं से रक्षा करें) 8
ॐ परब्रह्मणे नमः
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्। अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः॥
ह्रीं भैरव भयंकरहर मां रक्ष-रक्ष हुं फट् स्वाहा।