शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
वरदविनायक मंत्र
ॐ वरदविनायकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअष्टविनायक मूल मंत्र
स्वरूपवरदविनायक (महड)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वरदविनायक (वरदान देने वाले) को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मन की पूर्ण संतुष्टि, आंतरिक खुशी और मनचाहे वरदान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
मन की पूर्ण संतुष्टि, आंतरिक खुशी और मनचाहे वरदान की प्राप्ति।
जप काल
महड पीठ का स्मरण करते हुए।
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ॐ विमलायै नमः
ॐ लक्ष्म्यै नमः
अहं सोममाहनसं बिभर्म्यहं त्वष्टारमुत पूषणं भगम्। अहं दधामि द्रविणं हविष्मते सुप्राव्ये यजमानाय सुन्वते॥
नमामि भार्गवं रामं रेणुकाचित्तनन्दनं। मोचिताम्बार्तिमुत्पातनाशनं क्षत्रनाशनम्॥
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
ॐ विश्वरेतसे नमः