श्रीराम मंत्र
ॐ वेदात्मने नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं चारों वेदों की मूल आत्मा और स्वरूप हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
इन 108 मंत्रों का शृंखलाबद्ध पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है
दरिद्रता व नकारात्मकता का नाश करता है
और अंततः वैकुण्ठ की प्राप्ति सुनिश्चित करता है
विस्तृत लाभ
इन 108 मंत्रों का शृंखलाबद्ध पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है; दरिद्रता व नकारात्मकता का नाश करता है; और अंततः वैकुण्ठ की प्राप्ति सुनिश्चित करता है।
जप काल
नित्य प्रातः या गोधूलि वेला में, तुलसी या रुद्राक्ष की माला से अनुष्ठानिक पाठ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रियै नमः
ॐ महिताय नमः
ॐ ग्रन्थबीजरूपायै स्वाहा मां सर्वतोऽवतु। (अर्थ: ग्रंथों का बीज रूप देवी मेरी सभी दिशाओं से रक्षा करें) 8
ॐ शिशुपालशिरश्छेत्त्रे नमः
नमो गुहाय भूतानां गुहासु निहिताय च । अणोरणीयसे तुभ्यं महतोऽपि महीयसे ॥
तडित्सुवर्णचम्पकप्रदीप्तगौरविग्रहे मुखप्रभापरास्तकोटिशारदेन्दुमण्डले। विचित्रचित्रसञ्चरच्चकोरशावलोचने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥