शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ विभावर्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविभावरी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रात्रि
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान की रात्रि में प्रकाशक बनना
विस्तृत लाभ
अज्ञान की रात्रि में प्रकाशक बनना
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ प्रजापतये नमः
ॐ गोविन्दाय नमः
ॐ अव्यक्ताय नमः
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
ॐ कपालमालिने नमः।