शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
विष्णुप्रिये! रत्नगर्भे! समस्तफलदे शिवे! त्वद्गर्भगतहेमादीन् सम्प्रदर्शय दर्शय॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारलक्ष्मी हृदय स्तोत्र (श्लोक 10)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे विष्णुप्रीये, हे रत्नगर्भा! आपके गर्भ में स्थित स्वर्ण आदि मुझे दिखाएं, प्रदर्शित करें 14।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्वर्ण और रत्नों की अपार वृद्धि
विस्तृत लाभ
स्वर्ण और रत्नों की अपार वृद्धि।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अमितमायाय नमः
ॐ शत्रुदर्पघ्नाय नमः
ॐ परस्मै धाम्ने नमः
अगजानन पद्मार्कं गजाननमहर्निशम् । अनेकदन्तं भक्तानाम् एकदन्तमुपास्महे ॥
यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवैः वेदैः साङ्गपदक्रमोपनिषदैः गायन्ति यं सामगाः । ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो यस्यान्तं न विदुः सुरासुरगणा देवाय तस्मै नमः ॥
ॐ गोलोकधामिन्यै राधायै नमः