शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीराम मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अष्टदिक्पालाः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारऔपनिषदिक ध्यान मंत्र।
स्वरूपअष्टदिक्पाल स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो आठों दिशाओं के रक्षक (दिक्पाल) स्वरूप हैं, उन राम को नमन।
जप काल
ध्यान-साधना, मोक्ष-कामना हेतु एकांत में मानसिक जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नारायणाद् ब्रह्मा जायते। नारायणाद् रुद्रो जायते।
ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं नमः।
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ॐ मदोत्कटाय नमः
ॐ श्रीं बं सौघ बलवर्धनाय बालेश्वराय रुद्राय फट् ॐ
ॐ पवित्राय नमः