शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ अधरं गोपिका पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपगोपिका
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
गोपिका मेरे अधर की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: निचले होंठ (अधर) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: निचले होंठ (अधर) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा। परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सम्बभूव॥
ॐ नाभिं मे पातु नरहरिः स्वनाभिब्रह्मसंस्तुतः
ॐ सेव्यायै नमः
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
ॐ कमलामोदमोदिन्यै नमः
ॐ भैरवीनाथाय नमः।